🌙 रात का साया – लंबी रहस्यमयी कहानी
कहते हैं हर शहर में कुछ ऐसे राज़ दफ़न होते हैं जिनके बारे में लोग बात नहीं करते। यह कहानी है अवनि की, जो एक पुराने हवेली में रात गुज़ारने आई थी। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि यह रात उसकी ज़िंदगी की सबसे अजीब रात साबित होगी।
🏚️ पुरानी हवेली
अवनि एक पत्रकार थी। उसे एक असाइनमेंट मिला था—“पुरानी हवेली के रहस्य” पर रिपोर्ट तैयार करने का। गाँव वाले कहते थे कि उस हवेली में अजीब घटनाएँ होती हैं। कुछ लोग तो यह भी मानते थे कि वहाँ साया है।
शहर से दूर सुनसान इलाके में वह हवेली खड़ी थी। टूटी खिड़कियाँ, दीवारों पर उगी बेलें और भीतर फैली अजीब सी नमी—सब कुछ अजीब लग रहा था। लेकिन अवनि हिम्मत करके अंदर चली गई।
🔦 अंधेरे में हलचल
रात के करीब ग्यारह बजे, जब हवेली पूरी तरह अंधेरे में डूबी थी, तभी ऊपर की मंज़िल से चरमराहट की आवाज़ आई।
अवनि टॉर्च लेकर सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। हर कदम पर लकड़ी के फर्श की आवाज़ उसके दिल की धड़कनों से मेल खा रही थी। अचानक हवा का झोंका आया और दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
कमरे के अंदर… पुरानी तस्वीरें लटकी हुई थीं। सबकी नज़रें जैसे उसे घूर रही थीं।
👣 अजनबी कदमों की आहट
अचानक पीछे से कदमों की आहट आई। वह झटके से मुड़ी—कोई नहीं था। लेकिन धूल में ताज़े पैरों के निशान उभरे हुए थे।
उसने हिम्मत जुटाकर आवाज़ लगाई—“कौन है वहाँ?”
कोई जवाब नहीं आया, लेकिन एक ठंडी हवा का झोंका उसकी गर्दन से टकराया।
🕯️ रहस्य गहराता है
जैसे ही उसने टॉर्च घुमाई, उसे कमरे के कोने में एक पुराना लकड़ी का झूला दिखा। और हैरानी की बात ये थी कि वह अपने आप हिल रहा था।
अवनि के रोंगटे खड़े हो गए। उसी वक्त, एक मद्धम आवाज़ गूंजी—“यह घर छोड़ दो…”
😨 साया सामने आया
अवनि का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। अचानक दरवाज़ा बंद हो गया और कमरा पूरी तरह अंधेरे में डूब गया। टॉर्च की रोशनी जैसे किसी ने बुझा दी हो।
वह घबराकर इधर-उधर देखने लगी। तभी खिड़की पर बिजली चमकी ⚡ और एक पल के लिए उसने देखा—सफ़ेद कपड़ों में एक औरत खड़ी थी। उसका चेहरा ढका हुआ था, लेकिन उसकी आँखें लाल चमक रही थीं।
औरत धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगी…
🔚 रहस्यमयी अंत
अवनि ने डर के मारे आँखें बंद कर लीं। जब उसने दोबारा खोलीं तो वहाँ कोई नहीं था। लेकिन ज़मीन पर गीली मिट्टी के निशान अब भी मौजूद थे।
वह भागकर हवेली से बाहर निकली और तभी पीछे से एक धीमी हंसी की आवाज़ आई—“तुम फिर लौटोगी…”
उस दिन के बाद अवनि ने कभी उस हवेली का रुख नहीं किया। लेकिन उसकी डायरी में लिखा आख़िरी वाक्य आज भी रहस्य बना हुआ है:
👉 “उस रात मैंने किसी इंसान को नहीं, बल्कि रात के साये को देखा था।”
कभी-कभी हमें सिर्फ़ वही दिखता है, जिसे देखने के लिए हमारी आत्मा तैयार होती है।